
सड़क के उस पार भारी भीड़ लगी थी। स्कूल की बस से सिर निकाल कर मायरा ने देखा, एक लड़का बिना हैंडल पकड़े साइकिल चला रहा था, उसके कंधे पर एक बच्चा बैठा था। देखते ही देखते वो बच्चा लड़के के कंधे पर खड़ा
हो गया। सब लोग ताली बजाने लगे। बस आगे बढ़ गई।
शाम को मायरा अपने छोटे भाई ईशान के साथ ट्यूशन क्लास से वापस लौट रही थी। उसे घर की पास वाली दुकान पर वो ही सुबह वाला लड़का दिख गया। मायरा ने उसकी तरफ देख कर ईशान से कहा, ‘मैंने तुम्हें बताया था ना साइकिल वाले लड़के के बारे में? यही है।’ साइकिल वाला लड़का हंसने लगा, ‘मेरा नाम साइकिल वाला लड़का नहीं है, भीरू है।’
‘तुम्हें बिना हैंडल पकड़े साइकिल चलाने में डर नहीं लगता? ऊपर से तुमने अपने कंधे पर भी एक बच्चे को खड़ा कर रखा था?’ मायरा ने पूछा। भीरू ने कुछ लापरवाही से कहा, ‘मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता। ये तो मेरा काम है।’
ईशान ने कुछ आश्चर्य से उसकी तरफ देखा,‘तुम्हें डर नहीं लगता? रात को भी नहीं?’
‘रात से क्यों डरूं? मैं तो रात को भी करतब दिखाता हूं। तुम्हें देखना हो तो आ जाना। मंदिर के सामने जो बाजार है ना, रोज रात को मैं वहां करतब दिखाता हूं।’
‘कैसा करतब?’ ईशान ने पूछा।
‘बताऊंगा तो मजा कैसे आएगा? आज रात को आना जरूर!’
इतना कहकर भीरू वहां से चला गया।
रास्ते भर मायरा और ईशान इसी बारे में बात करते रहे कि भीरू रात को कौन सा करतब दिखाएगा? मायरा और ईशान पापा के ऑफिस से लौटने का इंतजार करने लगे। दोनों यही सोच रहे थे कि पापा को किसी भी तरह रात को उन्हें भीरू का करतब दिखाने ले जाने के लिए मनाना पड़ेगा।
पापा को दफ्तर में काम पड़ गया। ईशान मायूस हो गया, ‘दीदी, क्या हम भीरू का करतब नहीं देख पाएंगे?’
मायरा को भी यह देखने का बड़ा मन था कि इस बार भीरू क्या दिखाएगा? कहीं साइकिल हवा में तो नहीं उड़ाने लगेगा?
रात को खाना खाने के बाद मम्मी ने कहा, ‘कल स्कूल जाने के लिए जल्दी उठना है। तुम दोनों जा कर सो जाओ।’
मम्मी कमरे में टीवी देखने लगीं। ईशान ने धीरे से कहा, ‘दीदी, क्या तुम्हें भी डर लगता है?’ मायरा ने बहादुर बनते हुए कहा, ‘बिल्कुल नहीं। चलो, मैं तुम्हें ले चलती हूं।’
पैरों में चप्पल डाल कर दोनों पीछे के दरवाजे से घर से बाहर निकल आए। सड़क पर अंधेरा था। पर मायरा ने ठान रखा था कि वह बिल्कुल नहीं डरेगी। जब भीरू को किसी बात से डर नहीं लगता तो उसे क्यों लगे? अपने छोटे भाई का हाथ पकड़ कर वह तेजी से सड़क पर चलने लगी। मंदिर का रास्ता सुनसान था।
दोनों बाजार पहुंचे। लगभग सभी दुकानें बंद हो चुकी थीं। दोनों चुपचाप वहां बने एक पत्थर की पुलिया पर बैठ गए। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि वहां कोई खेल भी हो सकता है।
अचानक उनके सामने से कुछ लड़के गाना गाते हुए आए। मायरा ने ध्यान से देखा, ‘देख तो ईशान, भीरू तो नहीं है?’
पर वो कोई और ही लोग थे।
अब ईशान को थोड़ा डर लगने लगा,‘दीदी, भीरू पता नहीं क्या करतब दिखाएगा?’
मायरा ने बड़ी बनते हुए उसे समझाया, ‘जैसे भीरू को डर नहीं लगता ना, उस तरह हमें भी नहीं लगना चाहिए। तू तो साइकिल चलाने से कितना डरता है। कब से पापा कह रहे हैं साइकिल चलाने को। मुझे भी तो अंधेरे से डर लगता है। पर मैं आई हूं ना यहां। मुझे अब बिल्कुल डर नहीं लग रहा। आराम से बैठ।’
दस मिनट गुजर गए, बीस मिनट गुजर गए। बाजार बिल्कुल सुनसान हो गया। दोनों भाई-बहन चुपचाप पुलिया पर बैठे रहे। कुछ देर बाद साइकिल से एक आदमी गुजरा। ठीक मायरा और ईशान के सामने उसकी गाड़ी के पीछे रखा लाल रंग का एक थैला उछल कर जमीन पर जा गिरा। मायरा कुछ जोर से बोली, ‘साइकिल वाले रुक जाओ। आपका सामान नीचे गिर गया है।’
साइकिल वाला रुक गया। पलट कर आया और सामान उठाते हुए दोनों बच्चों को देख कर हैरान हो गया, ‘तुम लोग इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो?’
ईशान ने हिम्मत से कहा, ‘हम साइकिल का करतब देखने आए हैं?’
साइकिल वाला हंसने लगा, ‘इस समय?’
मायरा ने उसे पूरी बात बताई। साइकिल वाला थोड़ा सा रुक कर बोला,‘साइकिल पर करतब दिखाने वाला लड़का तो यहां से चला गया। वो एक शहर में ज्यादा दिन थोड़े ही रुकता है? सुबह यहां था, शाम को कहीं और चला गया होगा।’ ईशान मायूस हो गया। साइकिल वाले आदमी ने कहा,‘रात हो गई है। मैं तुम दोनों को घर छोड़ देता हूं। बेटी तुम साइकिल के पीछे बैठ जाओ। यह थैली पकड़ लेना। और राज बहादुर आगे डंडी पर बैठेंगे।’
दोनों बच्चे साइकिल पर बैठ गए। बीच रास्ते में उन्होंने पाया कि साइकिल चलाने वाला बूढ़ा आदमी बिना हैंडल पकड़े आराम से साइकिल चला रहा है।
घर के सामने उन्हें छोड़ कर वह चला गया। मायरा और ईशान पीछे के दरवाजे से अंदर आए। कमरे में आ कर ईशान ने मायरा का हाथ पकड़ कर कहा, ‘दीदी, मुझे अच्छा लग रहा है।’
अगले दिन मायरा सुबह सो कर उठी तो ईशान कमरे में नहीं था। वह दौड़ कर बाहर गई। पापा बरामदे में खड़े जोर-जोर से कह रहे थे-शाबाश ईशान। ईशान पूरे आत्मविश्वास के
साथ सड़क पर साइकिल चला रहा था!
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